रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। इस फैसले से बकाया बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा और निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान करने पर किसी भी प्रकार का सरचार्ज नहीं देना होगा।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को राहत देना और उन्हें बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के लंबित बिजली बिलों का भुगतान करने का अवसर उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे योजना की बढ़ाई गई अवधि का लाभ उठाकर अपने बकाया बिजली बिल का समय पर भुगतान करें।
पावर कंपनी ने नई व्यवस्था को लेकर दूर किया भ्रम
इधर, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में लेट पेमेंट सरचार्ज को लेकर चल रही भ्रामक खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने कहा कि राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) द्वारा लागू नई व्यवस्था उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
कंपनी के अनुसार, ‘रोजाना ब्याज’ या ‘दोहरा झटका’ जैसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं और वास्तविक नियमों से मेल नहीं खातीं।
पुरानी व्यवस्था में मामूली देरी पर भी लगता था पूरे महीने का सरचार्ज
पावर कंपनी के मुताबिक, पहले यदि कोई उपभोक्ता नियत तिथि के बाद सिर्फ एक या दो दिन की देरी से भी बिजली बिल जमा करता था, तो उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
नई व्यवस्था में जितनी देरी, उतना ही अधिभार
नई व्यवस्था के तहत अब विलंब अधिभार की गणना प्रतिदिन के आधार पर होगी। उपभोक्ताओं से अब केवल 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लेट फीस ली जाएगी। यानी जितने दिन भुगतान में देरी होगी, उतने ही दिनों का अधिभार देना होगा।
यदि किसी उपभोक्ता से केवल एक दिन की देरी होती है, तो उसे सिर्फ 0.04 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। वहीं, अगर पूरे 30 दिन की देरी भी होती है, तब भी कुल अधिभार 1.2 प्रतिशत ही बनेगा, जो पहले की 1.5 प्रतिशत दर से कम है।
अफवाहों से बचने की अपील
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था में लेट पेमेंट सरचार्ज की दर कम की गई है, बढ़ाई नहीं गई है। इसलिए इसे रोजाना बढ़ने वाला भारी ब्याज या उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। कंपनी ने आम नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि सही जानकारी ही साझा करें, ताकि उपभोक्ताओं के बीच किसी प्रकार का भ्रम न फैले।
