छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत पूरे राज्य में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 8वीं बोर्ड परीक्षा के अंतिम दिन एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां प्रश्नपत्र में कुछ सवालों के जवाब लिखने के लिए पर्याप्त स्थान ही नहीं दिया गया। इस गलती ने हजारों छात्रों को परीक्षा के दौरान असमंजस और तनाव में डाल दिया।
10 अंकों के सवाल में जगह गायब, छात्रों को हुआ नुकसान
जानकारी के अनुसार, प्रश्नपत्र के प्रश्न क्रमांक 17 में 10 अंकों का प्रश्न विकल्प के साथ दिया गया था। हैरानी की बात यह रही कि दोनों ही विकल्पों के उत्तर लिखने के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं था। ऐसे में छात्रों को या तो सीमित जगह में ही जवाब लिखना पड़ा या कई छात्र उत्तर ही पूरा नहीं कर पाए।
इस तकनीकी चूक ने परीक्षा की गति और एकाग्रता दोनों को प्रभावित किया, जिससे छात्रों का प्रदर्शन भी प्रभावित होने की आशंका है।
परीक्षा सत्र में लगातार सामने आ रहीं गड़बड़ियां
यह कोई पहली घटना नहीं है। पूरे परीक्षा सत्र के दौरान कई स्तरों पर लापरवाही सामने आती रही है। पहले भी प्रश्नपत्रों में त्रुटियां, सिलेबस से बाहर के सवाल और प्रबंधन संबंधी खामियां उजागर हो चुकी हैं।
पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
राज्य की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही विवादों में रही है:
- 12वीं बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया
- 5वीं और 8वीं की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर सवाल उठे
- कई केंद्रों पर शिक्षकों द्वारा नकल कराने के आरोप लगे
- प्रश्नपत्रों की कमी के चलते फोटोकॉपी कर पेपर बांटे गए
इन घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिक्षा व्यवस्था की साख पर असर
लगातार सामने आ रही इन खामियों ने राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ परीक्षा आयोजित कराना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इन लगातार हो रही गलतियों के लिए जिम्मेदार कौन है और उनकी जवाबदेही कब तय की जाएगी। अभिभावकों और शिक्षाविदों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा नुकसान छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
सुधार की दिशा में ठोस कदम जरूरी
मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि शिक्षा विभाग परीक्षा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करे, निगरानी तंत्र को मजबूत बनाए और भविष्य में ऐसी गंभीर लापरवाहियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए।
