छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरों से रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव, बाजार में लौटा भरोसा

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रायपुर : रायपुर से आई बड़ी खबर के मुताबिक छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 के लिए लागू नई संपत्ति गाइडलाइन दरों ने रियल एस्टेट सेक्टर में नई दिशा तय कर दी है। करीब आठ साल बाद किए गए इस व्यापक संशोधन का उद्देश्य जमीन और मकानों की कीमतों को वास्तविक बाजार दरों के करीब लाना है। इस फैसले को विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार की मजबूत प्रशासनिक सोच और दूरदर्शिता से जोड़ा जा रहा है।

रजिस्ट्री और बाजार मूल्य के बीच की खाई कम

पहले लंबे समय तक दरों में बदलाव नहीं होने के कारण रजिस्ट्री और वास्तविक बाजार कीमत में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। कई जगह संपत्ति की खरीद वास्तविक मूल्य पर होती थी, लेकिन दस्तावेजों में कम दर दर्ज की जाती थी। नई गाइडलाइन लागू कर इस अंतर को खत्म करने की कोशिश की गई है, जिससे लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है।

वैज्ञानिक तरीके से तय की गई नई दरें

नई दरों को तय करने में केवल कागजी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, बल्कि जिलेवार बिक्री आंकड़े, राजस्व रिकॉर्ड, बाजार विश्लेषण और जमीनी सर्वेक्षण को आधार बनाया गया। सड़क कनेक्टिविटी, शहरी विस्तार और आर्थिक गतिविधियों जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दरें काफी कम थीं, वहां 100 से 300 प्रतिशत तक सुधार किया गया, जबकि शहरी इलाकों में संतुलन बनाए रखने के लिए बाद में राहत भी दी गई।

निवेश और निर्माण गतिविधियों में तेजी

नई दरों के बाद डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट प्लानिंग आसान हुई है। साल 2026 की पहली तिमाही में नए प्रोजेक्ट पंजीकरण में लगभग 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रायपुर, कोरबा और अन्य शहरों में नई कॉलोनियों और टाउनशिप परियोजनाओं को गति मिली है।

स्व नामांतरण से प्रक्रिया हुई आसान

नई व्यवस्था के तहत संपत्ति पंजीयन के साथ ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। इससे लोगों को अलग से सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। यह पहल पारदर्शिता और समय बचत दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

महिलाओं को 50 प्रतिशत छूट, सामाजिक बदलाव की पहल

नई नीति में महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन करने पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। इससे न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि संपत्ति स्वामित्व में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

ग्रामीण और किसानों को सीधा फायदा

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जटिल दर प्रणाली को खत्म कर मूल्यांकन को सरल बनाया गया है। अब हेक्टेयर आधारित दरों से जमीन का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को मिलने वाले मुआवजे में भी 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

बैंकिंग और लोन प्रक्रिया में सुधार

नई गाइडलाइन दरों के चलते बैंक अब संपत्तियों का ज्यादा सटीक मूल्यांकन कर पा रहे हैं। इससे होम लोन स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है और रिपोर्ट के अनुसार इसमें करीब 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जटिलता कम, व्यवस्था हुई सरल

नई गाइडलाइन में पुराने जटिल ढांचे को सरल किया गया है। नगर क्षेत्रों में कंडिकाओं की संख्या 200 से घटाकर 102 कर दी गई है, जिससे आम लोगों के लिए दरों को समझना आसान हो गया है। एक ही इलाके में अलग अलग दरों की समस्या भी अब खत्म की गई है।

पारदर्शी और संतुलित व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

यह पूरा बदलाव केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा सुधार है। नई नीति से यह साफ संदेश गया है कि स्पष्ट नियम और मजबूत नेतृत्व के साथ विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।

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