अंबिकापुर : में निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दो बड़े स्कूलों में चल रही अवैध वसूली और नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ है।
अचानक निरीक्षण में खुली पोल
जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम की टीम उस समय स्कूल पहुंची, जब वहां अभिभावकों और शिक्षकों की बैठक चल रही थी। मौके पर अभिभावकों से बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिससे पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।
दोनों स्कूलों को नोटिस, जवाब के लिए 2 दिन की मोहलत
प्रशासन ने दोनों स्कूलों को नोटिस जारी करते हुए दो दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा है। स्पष्ट किया गया है कि जवाब न मिलने पर अवैध रूप से वसूली गई फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा।
किताबों और कॉपियों में जबरन खरीद का दबाव
जांच में सामने आया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
कई मामलों में किताबों को बंडल बनाकर बेचा गया और अलग अलग किताबें लेने का विकल्प भी नहीं दिया गया।
निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने के आरोप
जांच में पाया गया कि NCERT की किताबों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें पढ़ाई जा रही थीं। यह सीबीएसई के नियमों का उल्लंघन है, खासकर नर्सरी से 8वीं तक के कक्षाओं में।
फीस में तय सीमा से अधिक बढ़ोतरी
नियमों के अनुसार फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति होती है, लेकिन जांच में 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी सामने आई।
साथ ही हर साल एडमिशन फीस वसूली भी प्रमाणित हुई, जो नियमों के खिलाफ है।
अलग अलग तरीकों से की जा रही वसूली
जांच में यह भी सामने आया कि फील्ड ट्रिप, वर्कशॉप और सेमिनार के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा था।
इसके अलावा यूनिफॉर्म और किताबें भी तय दुकानों से खरीदने के लिए दबाव बनाया गया।
दूसरे स्कूल में भी मिली गंभीर गड़बड़ियां
दूसरे स्कूल में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आईं। यहां भी निजी प्रकाशकों की किताबें अनिवार्य की गई थीं और रजिस्ट्रेशन, एडमिशन तथा सिक्योरिटी फीस वसूली जा रही थी, जो कानूनन प्रतिबंधित है।
अभिभावकों पर आर्थिक बोझ
इन अनियमितताओं के कारण अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। शिक्षा के नाम पर इस तरह की वसूली ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे की कार्रवाई पर नजर
प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि स्कूलों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या मामला यहीं तक सीमित रहेगा।
