देश : चर्चित सिविल सेवा कोचिंग संचालक Shubhra Ranjan के साथ भोपाल में हुई घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 3 मई को उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा किया गया और करीब 1.89 करोड़ रुपये की फिरौती मिलने के बाद ही छोड़ा गया। इस पूरे घटनाक्रम ने अपराध के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है।
फिल्मी अंदाज में अपहरण, पैसे मिलने तक रखा बंधक
जानकारी के अनुसार अपराधियों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से Shubhra Ranjan का अपहरण किया। उन्हें तब तक बंधक बनाकर रखा गया जब तक कि भारी रकम नहीं मिल गई। पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस घटना ने आम लोगों के बीच डर और असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है।
आंकड़े चौंकाने वाले: 10 साल में 10 लाख से ज्यादा केस
National Crime Records Bureau के आंकड़ों के मुताबिक भारत में अपहरण के मामलों में पिछले एक दशक में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पिछले 10 वर्षों में 10 लाख से अधिक अपहरण के मामले सामने आए हैं।
1953 से 2024 तक दर्ज कुल मामलों में से 54 प्रतिशत केस केवल पिछले 11 वर्षों में हुए हैं।
कुल आपराधिक मामलों में अपहरण की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
हर अपहरण फिरौती के लिए नहीं: असली वजहें ज्यादा जटिल
दिलचस्प बात यह है कि फिरौती से जुड़े मामले कुल घटनाओं का बहुत छोटा हिस्सा हैं।
जबरन उठाने या गायब करने के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं।
शादी के उद्देश्य से महिलाओं का अपहरण भी बड़ी वजह है।
इसके अलावा पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत दुश्मनी भी कई मामलों की जड़ में होती है।
राज्यों की तस्वीर बदली: यूपी और महाराष्ट्र आगे, बिहार नीचे खिसका
राज्यवार आंकड़ों में भी बदलाव देखने को मिला है। Uttar Pradesh और Maharashtra अब भी अपहरण के मामलों में शीर्ष पर बने हुए हैं। वहीं Bihar, जो लंबे समय तक तीसरे स्थान पर था, अब 2024 के आंकड़ों में छठे स्थान पर पहुंच गया है, जिसे वहां की कानून व्यवस्था में सुधार का संकेत माना जा रहा है।
बड़ा सवाल: क्या सुरक्षित हैं आम लोग?
भोपाल की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त है। बढ़ते मामलों के बीच अब सख्त कदम और मजबूत निगरानी की मांग तेज होती जा रही है।
