मासूम जिंदगी से जंग : 2 महीने की बच्ची दुर्लभ बीमारी से पीड़ित, 9.40 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत

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मंदसौर : जिले से एक बेहद भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां महज 2 महीने की बच्ची गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है। इलाज के लिए करोड़ों रुपये के इंजेक्शन की जरूरत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।


क्या है बीमारी, क्यों है इतनी खतरनाक

डॉक्टरों के अनुसार बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित है।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक ऐसी आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें धीरे धीरे मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं।

इस बीमारी के कारण

  • सांस लेने में परेशानी होती है
  • दूध पीने में दिक्कत आती है
  • शरीर की हरकतें सीमित हो जाती हैं
  • सिर तक हिलाना मुश्किल हो जाता है

तीन साल बाद मिली खुशी, अब बड़ी परीक्षा

मामला गरोठ कस्बे का है, जहां परिवार को तीन साल की मन्नतों के बाद बेटी का जन्म हुआ था। माता पिता ने उसका नाम सृष्टि रखा, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

स्थानीय डॉक्टरों से इलाज न मिलने पर परिजन उसे जयपुर ले गए, जहां जांच में इस गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई।


इलाज इतना महंगा कि पहुंच से बाहर

डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी के इलाज के लिए Zolgensma नाम का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ 40 लाख रुपये है और यह अमेरिका से मंगवाना पड़ता है।

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, ऐसे में यह खर्च उठाना उनके लिए असंभव है।


पिता का छोटा काम, बड़ा संघर्ष

बच्ची के पिता गौरव सोनी गरोठ में एक छोटी सी पंचर दुकान चलाते हैं। सीमित आय में परिवार का गुजारा मुश्किल से होता है। ऐसे में इस भारी खर्च ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।


पूरे कस्बे की दुआएं, मदद की आस

सृष्टि की हालत देखकर पूरे इलाके के लोग उसके लिए दुआ कर रहे हैं। हर कोई मदद करना चाहता है, लेकिन इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं है।


सरकार से लगाई मदद की गुहार

मासूम की मां पूजा सोनी ने मोहन यादव और नरेंद्र मोदी से सहायता की अपील की है।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज नहीं हुआ तो बच्ची की हालत और गंभीर हो सकती है।


उम्मीद अभी बाकी है

परिजन और स्थानीय लोग जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनकी एक ही इच्छा है कि सृष्टि को समय पर इलाज मिल सके और वह सामान्य जिंदगी जी सके।

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