बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। पहले मामले में अदालत ने रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले पुनर्वास रोजगार के दावे में नाती को भी पात्र मानते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। वहीं, दूसरे मामले में बिना विभागीय जांच के बर्खास्त किए गए होमगार्ड जवान की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर बहाली के निर्देश दिए हैं।
रेलवे भूमि अधिग्रहण के बदले नाती के रोजगार दावे पर विचार
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के स्थान पर पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा ने की। मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा का है। यहां महेश राम के नाम की 0.004 हेक्टेयर जमीन रेलवे लाइन विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई थी।
जमीन के बदले उनकी बेटी सावित्री बाई ने रोजगार मांगा, लेकिन आयु सीमा के आधार पर दावा खारिज कर दिया गया। इसके बाद उनके बेटे सनत कुमार कश्यप ने नाना की जमीन के बदले नौकरी की मांग की। रेलवे ने अपनी नीति का हवाला देते हुए नाती को पात्र मानने से इनकार किया था।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 31 जुलाई 2025 को रेलवे को दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। रेलवे की चुनौती पर हाई कोर्ट ने अधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन मालिक के परिवार के किसी सदस्य को अब तक पुनर्वास रोजगार नहीं मिला है, तो नाती के दावे पर विचार किया जा सकता है।
10 साल बाद होमगार्ड जवान की बहाली का रास्ता साफ
दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने होमगार्ड जवान गजाधर कुमार नाग की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की पीठ ने लागू सेवा नियमों के अनुसार उनकी बहाली के निर्देश दिए।
गजाधर नाग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में सेवा से हटा दिया गया था। जवान का कहना था कि वह मलेरिया और टाइफाइड से पीड़ित था और अस्पताल में भर्ती रहा था।
अदालत ने पाया कि सेवा समाप्त करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया, न आरोप पत्र जारी हुआ और न ही विभागीय जांच कराई गई। जवान को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया। अनुपस्थिति अवधि के संबंध में चिकित्सा दस्तावेजों और सेवा नियमों के अनुसार निर्णय लेने की बात कही गई है।
