रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले डिजिटल सर्वे और ऑनलाइन गिरदावरी की गड़बड़ियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में धान की फसल तैयार है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कहीं रकबा शून्य दर्ज है तो कहीं खेतों की लोकेशन और खसरा नंबर गलत दिखाई दे रहे हैं। फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप की इन खामियों से किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने में परेशानी होने की आशंका है।
कचना में तालाब के बीच दिखी खेत की लोकेशन
रायपुर के कचना क्षेत्र में सर्वे के दौरान एक खेत की लोकेशन डिजिटल मैप पर कचना तालाब के बीच दिखाई देने का मामला सामने आया है। इससे ऐप की लोकेशन मैपिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
रायगढ़ में एक जगह दिख रहे कई खसरे
रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड के दर्रामुंडा गांव में खसरा नंबर 6/3 और 7/5 अलग-अलग स्थानों पर होने के बावजूद ऐप में एक ही जगह दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 10/1/क, 10/1/ख और 11/2/ख की लोकेशन भी एक जैसी दर्ज होने की शिकायत है। नक्शे में खसरा नंबरों का क्रम भी गड़बड़ बताया जा रहा है।
सूरजपुर में धान का रकबा शून्य
सूरजपुर के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र के कई गांवों में किसानों की शिकायत है कि खेतों में धान की फसल होने के बावजूद ऑनलाइन गिरदावरी में रकबा जीरो दिख रहा है। किसानों ने रिकॉर्ड में जल्द सुधार की मांग की है।
धान खरीदी का समय नजदीक है। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड की त्रुटियां दूर नहीं हुईं तो किसानों को पंजीयन और उपज बेचने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
