रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से डीएमएफ की राशि के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान करीब 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की गई है।
खरीद आदेशों पर 25 से 50 प्रतिशत कमीशन का आरोप
ईडी की जांच के मुताबिक, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और लोगों के कल्याण के लिए निर्धारित डीएमएफ राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क ने चुनिंदा कंपनियों को खरीद आदेश दिलाए और सामान की कीमतें बढ़ाकर दिखाई गईं।
एजेंसी का दावा है कि खरीद आदेशों की मूल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। इस रकम का एक हिस्सा अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। कमीशन का लेनदेन नकद और बैंक खातों के जरिए किया जाता था।
सतपाल चाबड़ा समेत 17 आरोपियों पर कार्रवाई
ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह चाबड़ा इस नेटवर्क में प्रमुख बिचौलिये और वित्तीय समन्वयक की भूमिका निभा रहा था। उसे 1 सितंबर 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था। अब उसके साथ मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों के खिलाफ शिकायत दाखिल की गई है।
ईडी ने अपराध से अर्जित संपत्ति करीब 35 करोड़ रुपये आंकी है। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें आईएएस अधिकारी रानू साहू भी शामिल हैं। प्रकरण में कुल करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। मामले की जांच जारी है।
