केशकाल में सिंदूर खेला के बाद मां दुर्गा को विदाई, अगले बरस फिर आने की कामना

admin  - News & Entertainment
2 Min Read

केशकाल। छत्तीसगढ़ के केशकाल में दुर्गा पूजा के समापन पर बंग समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी। सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस परंपरा में महिलाएं उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल हुईं। मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया।

सिंदूर खेला में दिखी बंग समाज की परंपरा

बंग समाज में सिंदूर खेला का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस परंपरा में महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसे आपसी प्रेम, सौहार्द और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।

नाचते-गाते निकली विसर्जन यात्रा

सिंदूर खेला के बाद श्रद्धालु नाचते-गाते और मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच भक्तों ने माता रानी को विदाई दी।

मां दुर्गा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं में भावुकता भी दिखाई दी। भक्तों ने माता से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही अगले वर्ष फिर से मां दुर्गा के आगमन की कामना की।

केशकाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने बंग समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक एकजुटता की झलक पेश की।

Share this Article