छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की एक महिला को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से बड़ी राहत मिली है। पति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद बीमा राशि के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाली तिहारो चिचाम के पक्ष में आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपये देने और निर्धारित अवधि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज चुकाने का निर्देश दिया है।
मामला बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव का है। तिहारो चिचाम के पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में बचत खाता था। बैंक के माध्यम से एक हजार रुपये प्रीमियम पर उनके नाम व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। पॉलिसी के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये देने का प्रावधान था।
सड़क हादसे में हुई थी पति की मौत
19 नवंबर 2023 को गणेश चिचाम मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे। मछलीरवां मंदिर के पास सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने बीमा राशि के लिए दावा किया, लेकिन कंपनी ने मृतक की कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देकर भुगतान से इनकार कर दिया।
महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग, कबीरधाम में शिकायत की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी पहले के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद तिहारो ने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की।
ठोस सबूत नहीं मिलने पर आयोग ने बदला फैसला
8 अक्टूबर 2026 को दिए गए आदेश में राष्ट्रीय आयोग ने कहा कि मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था। रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में भी विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी।
आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों के आदेश निरस्त करते हुए महिला को 20 लाख रुपये की बीमा राशि का हकदार माना। साथ ही, मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद की अवधि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया।
