छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल हिंसा और आईईडी विस्फोटों से प्रभावित लोगों की मदद के लिए दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय निःशुल्क शिविर शुरू किया गया है। सेवा संकल्प अभियान के तहत 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
शिविर का आयोजन जिला प्रशासन ने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग से किया है। इसमें कृत्रिम हाथ-पैर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कैलिपर्स सहित कई उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
किस जिले के कितने लोगों को मिलेगा लाभ?
शिविर में निर्धारित लाभार्थियों का जिलेवार विवरण इस प्रकार है:
- दंतेवाड़ा: 509 दिव्यांगजन
- बीजापुर: 197 दिव्यांगजन
- सुकमा: 62 दिव्यांगजन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्चुअल माध्यम से शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा समाप्त करने के साथ-साथ उससे प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना भी जरूरी है।
CM विष्णु देव साय ने विकास पर दिया जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाना है। उन्होंने दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, नियद नेल्लानार योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलकर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
कृत्रिम पैर मिलने से फिर चलने की उम्मीद
शिविर में पहुंचे लाभार्थियों ने सहायक उपकरण मिलने पर खुशी जताई। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। अब कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने की उम्मीद मिली है।
बीजापुर के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने भी बताया कि वर्ष 2012 में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्होंने दोबारा चल पाने को अपने लिए यादगार अनुभव बताया।
