छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाने के लिए आईआईटी भिलाई और बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने संयुक्त पहल की है। इसके तहत भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में इस्तेमाल होने वाले महंगे आयातित कलपुर्जों के स्वदेशी विकल्प तैयार करने में स्थानीय उद्योगों और एमएसएमई को तकनीकी मदद दी जाएगी। इस पहल से विदेशी निर्भरता घटाने, उत्पादन लागत कम करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रिवर्स इंजीनियरिंग से तैयार होंगे कलपुर्जे
इस पहल को लेकर आईआईटी भिलाई परिसर में संस्थान के अधिकारियों और बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इसमें स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।
आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने उद्योगों को संस्थान की प्रयोगशालाओं, अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ देने का भरोसा दिलाया।
3डी स्कैनिंग से होगी कलपुर्जों की जांच
इस परियोजना के शुरुआती चरण में सशुल्क परीक्षण किए जाएंगे। आईआईटी भिलाई के 3डी स्कैनर, विशेष सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर एडेड डिजाइन (CAD) तकनीक से आयातित कलपुर्जों की बनावट और डिजाइन का विश्लेषण किया जाएगा।
इसके बाद प्रयोगशाला में सामग्री की रासायनिक संरचना और टिकाऊपन की जांच होगी। जांच रिपोर्ट और मटेरियल टेस्ट सर्टिफिकेट के आधार पर स्थानीय उद्योगों को गुणवत्ता वाले स्वदेशी विकल्प विकसित करने में सहायता मिलेगी।
एमएसएमई और युवाओं को मिलेगा फायदा
बीएसपी एंसिलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन दासगुप्ता के मुताबिक, स्थानीय उद्योगों में जटिल कलपुर्जे बनाने की क्षमता है। आईआईटी भिलाई की तकनीकी मदद से इस क्षमता को और बढ़ाया जा सकेगा। आगे बीएसपी प्रबंधन, एसोसिएशन और आईआईटी भिलाई के बीच त्रिपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
यह पहल मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इससे स्थानीय कंपनियों को नए अवसर मिलने के साथ औद्योगिक उत्पादन में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है।
