रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मानवता और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश करने वाली एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की त्वरित पहल से दो मासूम बहनों का दो साल से रुका हुआ शिक्षा का सफर फिर शुरू होने जा रहा है। स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) और रिजल्ट नहीं मिलने के कारण दोनों बच्चियां लंबे समय से पढ़ाई से वंचित थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने विशेष खंडपीठ गठित कर महज एक सप्ताह के भीतर विवाद का समाधान कर दिया।
महज सात दिनों में मिला समाधान
यह मामला 18 जून को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संज्ञान में आया था। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए विशेष फास्ट ट्रैक खंडपीठ का गठन किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 24 जून को मामले का समाधान कर बच्चियों की शिक्षा का रास्ता साफ कर दिया गया।
आर्थिक संकट ने छीन लिया था पढ़ाई का अधिकार
जांच में सामने आया कि दोनों बहनों का परिवार लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। कुछ समय पहले उनके पिता ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि उनकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की परिस्थितियां बिगड़ने के बाद मां अपनी बेटियों का दूसरे स्कूल में दाखिला कराना चाहती थीं, लेकिन पुराने स्कूल से टीसी और रिजल्ट नहीं मिलने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से दोनों बच्चियां करीब दो वर्षों तक पढ़ाई से दूर रहीं।
आयोग की पहल से स्कूल ने दिखाई संवेदनशीलता
मामला सामने आने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्कूल प्रबंधन से चर्चा कर बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक समाधान निकालने की अपील की। आयोग की पहल का असर यह हुआ कि स्कूल प्रबंधन ने दोनों छात्राओं की पूरी बकाया फीस माफ कर दी और तत्काल उनका रिजल्ट तथा ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया।
42 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी मिलेगी
स्कूल प्रबंधन ने केवल दस्तावेज ही नहीं सौंपे, बल्कि दोनों बहनों की आगे की पढ़ाई में सहयोग देने का भी निर्णय लिया। इसके तहत प्रत्येक छात्रा को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। इस तरह दोनों बहनों को कुल 42 हजार रुपये की मदद मिलेगी, जिससे उनकी आगे की शिक्षा में आर्थिक बाधा नहीं आएगी।
मां ने जताया आयोग का आभार
बच्चियों की मां ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और स्कूल प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली इस मदद से उनकी बेटियों का भविष्य फिर से संवरने की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि अब उनकी बेटियां दोबारा स्कूल जाकर अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।
