दुर्ग में रेलवे लाइन किनारे अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई, चार दुकानें ढहाईं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चला बुलडोजर

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दुर्ग। दुर्ग नगर निगम ने गुरुवार सुबह शहर के बोरसी भाठा इलाके में दुर्ग-बालोद रेलवे लाइन के किनारे बने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार दुकानों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान न्यायालय के आदेश और तय कानूनी प्रक्रिया के तहत चलाया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

सुबह तड़के शुरू हुई कार्रवाई

नगर निगम की टीम ने सुबह कार्रवाई शुरू करने से पहले संबंधित निर्माणों पर नोटिस चस्पा किए। इसके बाद जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों के मुताबिक एसडीएम न्यायालय ने पहले अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। प्रभावित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी, लेकिन करीब एक सप्ताह पहले अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई को अमल में लाया।

प्रशासनिक अमला और पुलिस रही मौके पर मौजूद

कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, एसडीएम कार्यालय के अधिकारी, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही मौके पर मौजूद रहे। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, हालांकि अधिकारी मीडिया से बातचीत करने से बचते नजर आए।

प्रभावित लोगों ने उठाए सवाल

कार्रवाई के बाद प्रभावित पक्षों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। पूर्व पार्षद ज्ञानदास बंजारे ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त सूचना दिए सुबह तड़के कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि उनका परिवार वर्ष 1956 से इस क्षेत्र में रह रहा है और राजनीतिक कारणों से उनके वार्ड को निशाना बनाया गया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें पहले 25 तारीख तक कार्रवाई नहीं होने की जानकारी दी गई थी। अब वे इस मामले में दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।

नए आदेश की जानकारी नहीं मिलने का दावा

एक अन्य प्रभावित व्यक्ति जीवन यादव ने कहा कि उनका मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन था और उन्हें किसी नए आदेश की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया।

कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई कार्रवाई

प्रशासन का कहना है कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है। वहीं प्रभावित पक्ष अब इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

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