राम मंदिर दान विवाद पर बोले देवकीनंदन ठाकुर, कहा- श्रद्धा के धन में गड़बड़ी बेहद गंभीर, मंदिरों के लिए अलग बोर्ड बनाने की वकालत

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भोपाल। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राम जन्मभूमि से जुड़े दान विवाद, मंदिरों के प्रबंधन, न्याय व्यवस्था और विवाह संस्कारों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन आस्था और विश्वास का प्रतीक होता है, इसलिए उसके दुरुपयोग से समाज की भावनाएं आहत होती हैं।

राम मंदिर दान विवाद पर जताई चिंता

राम मंदिर से जुड़े कथित दान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि मंदिर निर्माण के कुछ समय बाद ही इस तरह के विवाद सामने आना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने मंदिर के धन के उपयोग में गड़बड़ी की है तो उसे अपनी गलती स्वीकार कर संबंधित राशि वापस करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर आरोप सिद्ध हो जाएं, उन्हें जिम्मेदार पदों से हटाना आवश्यक है ताकि धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।

‘मंदिर का धन खाने वाला 60 हजार वर्ष तक मल का कीड़ा बनेगा’

कार्यक्रम के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिरों का संचालन ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए जो धर्म और उसकी मर्यादाओं को समझते हों। उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करेगा, वह 60 हजार वर्ष तक मल का कीड़ा बनेगा। यदि लोगों को इस बात का ज्ञान होगा तो कोई भी मंदिर की एक रुपये की राशि पर गलत नजर नहीं डालेगा।”

मंदिरों के लिए अलग ‘सनातन बोर्ड’ बनाने की मांग

कथावाचक ने देशभर के मंदिरों के संचालन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन बोर्ड’ का गठन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार इससे धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील

न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कई मामलों में निर्णय आने में वर्षों लग जाते हैं। उनका मानना है कि धार्मिक और सामाजिक महत्व से जुड़े मामलों में समयबद्ध सुनवाई और त्वरित निर्णय होने चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास न्याय व्यवस्था में बना रहे।

विवाह संस्कारों को लेकर भी रखी राय

विवाह परंपराओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में विवाह केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण संस्कार है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में विवाह प्रायः दिन के समय और विशेष रूप से गोधूलि बेला में संपन्न होते थे, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता था।

उन्होंने कहा कि समय के साथ रात में विवाह करने की परंपरा बढ़ी है, लेकिन समाज को इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए और पारंपरिक मूल्यों को समझने का प्रयास करना चाहिए।

धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता पर दिया जोर

देवकीनंदन ठाकुर ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि धर्म और समाज से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता का पालन अत्यंत आवश्यक है। इससे श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा और धार्मिक परंपराओं की गरिमा भी बनी रहेगी।

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