मुंबई। अभिनेता, मॉडल और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय की चर्चित शख्सियत Sushant Divgikar ने अपनी जेंडर पहचान को लेकर खुलकर बात की है। अब वह रानी को-ही-नूर के नाम से पहचानी जाती हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने जीवन, पहचान, ट्रोलिंग और समाज के नजरिए पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
‘जन्म लड़के के रूप में हुआ, लेकिन हमेशा खुद को अलग महसूस किया’
रानी को-ही-नूर ने बताया कि उनका जन्म भले ही एक लड़के के रूप में हुआ था, लेकिन बचपन से ही वह खुद को अलग तरह से महसूस करती थीं। उन्होंने कहा कि जिंदगी हर व्यक्ति को केवल एक बार मिलती है और ऐसे में वही जीवन जीना चाहिए जिसमें इंसान खुद को सहज, खुश और सच्चा महसूस करे।
उन्होंने कहा कि अपनी असली पहचान को स्वीकार करना उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला रहा और इससे उन्हें आत्मिक संतोष मिला।
ट्रोलिंग पर दिया बेबाक जवाब
सोशल मीडिया पर मिलने वाली आलोचनाओं और ट्रोलिंग को लेकर भी रानी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर कौन क्या लिख रहा है, उससे उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले कई लोग खुद अपनी पहचान और भावनाओं को लेकर स्पष्ट नहीं होते।
रानी ने कहा कि कई बार लोग सार्वजनिक मंचों पर नकारात्मक टिप्पणियां करते हैं, लेकिन निजी संदेशों में उनका व्यवहार बिल्कुल अलग होता है। इससे उन्हें लगता है कि ऐसे लोग अपने भीतर चल रहे सवालों से भी जूझ रहे होते हैं।
‘मेरी पहचान मेरी निजी जिंदगी का हिस्सा है’
रानी को-ही-नूर का कहना है कि वह लड़का हैं या लड़की, इससे किसी और को फर्क नहीं पड़ना चाहिए। यह उनका निजी निर्णय और व्यक्तिगत जीवन का हिस्सा है। उनके मुताबिक किसी भी व्यक्ति को अपनी पहचान और जीवन जीने के तरीके को लेकर स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
अपनी शर्तों पर जी रही हैं जिंदगी
रानी को-ही-नूर ने अपनी अलग पहचान बनाते हुए मनोरंजन जगत में खास जगह बनाई है। अभिनय, मॉडलिंग और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के कारण उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। वह लगातार अपने काम के जरिए लोगों के बीच पहचान बना रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपनी जिंदगी जी रही हैं।
पहचान, आत्मविश्वास और स्वीकार्यता का संदेश
रानी की कहानी केवल व्यक्तिगत बदलाव की नहीं, बल्कि आत्मस्वीकृति और आत्मविश्वास की भी कहानी है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि व्यक्ति को समाज के डर या आलोचनाओं से ऊपर उठकर अपनी पहचान के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है।
