सीजफायर की उम्मीदों को बड़ा झटका! ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल का पलटवार, फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट संघर्ष

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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। कई सप्ताह से जारी युद्धविराम और शांति प्रयासों के बीच ईरान द्वारा इजरायल की ओर मिसाइलें दागे जाने के बाद क्षेत्र में हालात अचानक बदल गए हैं। इसके जवाब में इजरायल ने भी ईरान के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे संघर्ष के फिर से व्यापक रूप लेने की आशंका बढ़ गई है।

युद्धविराम के बाद पहली बार सीधे मिसाइल हमले से बढ़ी चिंता

रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने इजरायल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद ईरान की ओर से पहला प्रत्यक्ष मिसाइल हमला बताया जा रहा है। मिसाइलों की पहचान होते ही इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई और कई क्षेत्रों में सायरन बजने लगे।

इजरायली डिफेंस सिस्टम ने संभाला मोर्चा

इजरायली सेना ने दावा किया कि आने वाली मिसाइलों का समय रहते पता लगा लिया गया था और उन्हें रोकने के लिए रक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश खतरों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, हालांकि इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।

ईरान पर जवाबी कार्रवाई शुरू, कई शहरों में हमलों की खबर

मिसाइल हमले के बाद इजरायल ने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में तेहरान, इस्फहान, तबरीज और अन्य क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। ईरान ने सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।

शांति वार्ता पर मंडराया संकट

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और अन्य मध्यस्थ देशों की ओर से युद्धविराम को स्थायी बनाने के प्रयास जारी थे। ताजा हमलों ने उन कोशिशों को बड़ा झटका दिया है और कूटनीतिक समाधान की राह को और कठिन बना दिया है।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कथित तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बातचीत कर तनाव कम करने की अपील की थी। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका नहीं चाहता कि हालात पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ें, लेकिन ताजा सैन्य कार्रवाइयों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

पूरे क्षेत्र की नजर अगले कदम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को नियंत्रित कर पाएंगे या मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।

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