बेंगलुरु। कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन के बाद भी पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनी सरकार को शपथ ग्रहण के शुरुआती दिनों में ही मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर नाराजगी का सामना करना पड़ा है। इससे सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने की चुनौती चर्चा का विषय बन गई है।
विभाग आवंटन बना विवाद की वजह
सूत्रों के अनुसार, सरकार में कई वरिष्ठ नेताओं की नजर बेंगलुरु विकास, राजस्व और जल संसाधन जैसे अहम मंत्रालयों पर थी। विभागों के वितरण के बाद कुछ नेताओं ने असंतोष जताया, जिनमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया। बताया गया कि वे अपने विभाग को लेकर संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफा तक दे दिया था।
बातचीत के बाद सुलझा मामला
स्थिति को गंभीर होते देख कांग्रेस नेतृत्व सक्रिय हुआ और नाराज नेताओं से चर्चा की गई। पार्टी स्तर पर हुई बातचीत के बाद रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा वापस लेने का फैसला किया और सरकार में बने रहने पर सहमति जता दी। इसके बाद कांग्रेस ने संदेश देने की कोशिश की कि सभी मतभेद दूर कर लिए गए हैं।
गुटीय संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल विभागों की नाराजगी तक सीमित नहीं है। सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस के विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलना नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के वितरण को लेकर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
विपक्ष को मिला हमला बोलने का मौका
सरकार के गठन के तुरंत बाद सामने आए इस घटनाक्रम ने विपक्ष को कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर दे दिया है। विपक्षी दल इसे सरकार के भीतर समन्वय की कमी और सत्ता संघर्ष का संकेत बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने जताया भरोसा
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि सरकार पूरी तरह एकजुट है और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर सरकार पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी।
