मोबाइल नेटवर्क अकेले नहीं काफी! देशभर में पब्लिक वाई-फाई विस्तार पर जोर, ट्राई के रुख का स्वागत

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नई दिल्ली। देश में सस्ती और सर्वसुलभ इंटरनेट सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। नीति थिंक-टैंक Broadband India Forum ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण Telecom Regulatory Authority of India के उस दृष्टिकोण का स्वागत किया है, जिसमें पब्लिक वाई-फाई को ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक अवसंरचना के रूप में मान्यता दी गई है।

डिजिटल भारत के लिए सिर्फ मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता पर्याप्त नहीं

सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार से जुड़े ट्राई के परामर्श पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए बीआईएफ ने कहा कि भारत की बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना भविष्य में पर्याप्त नहीं होगा।

फोरम के अनुसार, पब्लिक वाई-फाई इंटरनेट सेवाओं को अधिक किफायती बनाने, इनडोर नेटवर्क कवरेज सुधारने, स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग और मोबाइल नेटवर्क पर बढ़ते डेटा ट्रैफिक का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

देशव्यापी रणनीति बनाने की मांग

बीआईएफ ने ट्राई से एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की सिफारिश की है। इसमें नेटवर्क अवसंरचना का विस्तार, तकनीकी उन्नयन, बड़े स्तर पर डिजिटल इकोसिस्टम का विकास और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने जैसे पहलुओं को शामिल करने की बात कही गई है।

फोरम का सुझाव है कि प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस योजना (पीएम-वानी) को भारतनेट, राज्य स्तरीय फाइबर नेटवर्क, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और अन्य सार्वजनिक डिजिटल परिसंपत्तियों से जोड़ा जाए। इससे देशभर में वाई-फाई हॉटस्पॉट्स की स्थापना की गति तेज हो सकती है।

लोगों को बताने होंगे पब्लिक वाई-फाई के फायदे

बीआईएफ का मानना है कि आम नागरिकों, व्यापारियों और स्थानीय उद्यमियों के बीच पब्लिक वाई-फाई की लागत, सुरक्षा, विश्वसनीयता और उपयोगिता को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की सिफारिश की गई है।

साथ ही पीएम-वानी के तहत मजबूत सुपर पीडीओए, स्केलेबल पीडीओए और एप्लीकेशन प्रदाताओं का नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि विभिन्न हॉटस्पॉट्स को एकीकृत और भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदला जा सके।

डिजिटल खाई को पाट सकता है पब्लिक वाई-फाई

बीआईएफ के अध्यक्ष TV Ramachandran ने कहा कि पब्लिक वाई-फाई भारत की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं में से एक बन सकता है। इसमें डिजिटल डिवाइड को कम करने और इंटरनेट पहुंच को व्यापक बनाने की बड़ी क्षमता है।

उन्होंने कहा कि पीएम-वानी ने लंबे समय से मौजूद कई नियामकीय बाधाओं को दूर कर सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अब जरूरत इसे बड़े स्तर पर विकसित करने की है।

टीएसपी और आईएसपी को साझेदार के रूप में देखने की सलाह

रामचंद्रन ने कहा कि ऐसा माहौल तैयार किया जाना चाहिए, जहां दूरसंचार सेवा प्रदाता और इंटरनेट सेवा प्रदाता पब्लिक वाई-फाई को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि ब्रॉडबैंड विस्तार के सहयोगी माध्यम के रूप में देखें।

उन्होंने निर्बाध रोमिंग, आसान लॉगिन और नेटवर्क खोज जैसी सुविधाओं के लिए खुले इंटरऑपरेबिलिटी मानकों को विकसित करने की भी सिफारिश की, ताकि वाई-फाई उपयोग का अनुभव मोबाइल इंटरनेट जितना सहज हो सके।

वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 के लिए राष्ट्रीय रोडमैप की जरूरत

फोरम ने अगली पीढ़ी की तकनीकों जैसे Wi‑Fi 6E और Wi‑Fi 7 को अपनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने का सुझाव दिया है।

इसके लिए सस्ते उपकरणों की उपलब्धता, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और नई इमारतों को तकनीकी रूप से तैयार करने जैसे कदमों को जरूरी बताया गया है।

दूरदराज क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने पर विशेष फोकस

बीआईएफ ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बाजार आधारित सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं या पर्याप्त नहीं हैं, वहां सार्वजनिक वित्तपोषण के माध्यम से वाई-फाई नेटवर्क का विस्तार किया जा सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण, दूरस्थ और कम विकसित क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने पर प्राथमिकता के साथ काम किया जाना चाहिए।

फोरम ने यह भी सुझाव दिया कि नगर निकाय और स्थानीय प्रशासन केवल अनुमति देने वाली संस्था न बनें, बल्कि डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार की भूमिका निभाएं।

डिजिटल कनेक्टिविटी के नए युग की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाता है, तो यह देश में इंटरनेट पहुंच को नई ऊंचाई दे सकता है। इससे डिजिटल सेवाओं का विस्तार होगा, डेटा लागत कम होगी और डिजिटल इंडिया अभियान को जमीनी स्तर पर नई गति मिलेगी।

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