उज्जैन : विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण मास के दौरान होने वाले विशेष भांग शृंगार को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर साल सावन में लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस दौरान होने वाले विशेष शृंगार का अलग ही धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी क्रम में भांग शृंगार के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
श्रद्धालु भी करा सकेंगे भांग शृंगार
मंदिर प्रशासन के अनुसार केवल पुजारी ही नहीं, बल्कि श्रद्धालु भी बाबा महाकाल के भांग शृंगार के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए संबंधित पुजारी की सहमति आवश्यक होगी। आवेदन के साथ सहमति पत्र जमा करना अनिवार्य रखा गया है।30 जुलाई से 28 अगस्त तक होने वाले विशेष शृंगार के लिए मंदिर कार्यालय में आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
चयन समिति तय करेगी तारीखें
इस बार मंदिर समिति ने प्रक्रिया में बदलाव करते हुए तारीख आवंटन की जिम्मेदारी चयन समिति को सौंपी है। आवेदन प्राप्त होने के बाद समिति श्रद्धालुओं और उपलब्ध तिथियों के आधार पर निर्णय लेगी।मंदिर प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और तारीखों को लेकर किसी प्रकार के विवाद की संभावना कम होगी।
भांग शृंगार पर कितना खर्च आता है?
श्रावण मास में बाबा महाकाल के विशेष भांग शृंगार के लिए लगभग 10 से 12 हजार रुपये तक का खर्च आता है। पहले सीमित शुल्क पर विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन या वैवाहिक वर्षगांठ के लिए तारीख निर्धारित कर दी जाती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया गया है।
भांग की मात्रा पर तय है सीमा
महाकाल मंदिर में होने वाले भांग शृंगार के लिए अधिकतम साढ़े तीन किलो भांग के उपयोग की अनुमति है। पहले इस शृंगार में पांच से सात किलो तक भांग का इस्तेमाल किया जाता था।बाद में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर भांग, पंचामृत और अन्य पूजन सामग्री की मात्रा को नियंत्रित किया गया, ताकि धार्मिक परंपराओं के साथ निर्धारित मानकों का भी पालन हो सके।
हर शाम होता है विशेष शृंगार
महाकाल मंदिर में प्रतिदिन संध्या आरती के दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक शृंगार किया जाता है। इसमें भांग, सूखे मेवे, हल्दी, चंदन और अन्य पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है।विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर भगवान महाकाल को विभिन्न दिव्य स्वरूपों में सजाया जाता है। इनमें भगवान गणेश, श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, सूर्यदेव, चंद्रदेव और शेषनाग सहित कई धार्मिक स्वरूप शामिल रहते हैं।
सावन में बढ़ जाता है महाकाल दरबार का आकर्षण
श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। विशेष भांग शृंगार और धार्मिक अनुष्ठान सावन के आकर्षण को और अधिक खास बना देते हैं।
