800 साल पुराने शिव मंदिर पर चला बुलडोजर, वारंगल में मचा बवाल, केंद्र सरकार ने शुरू की जांच

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नई दिल्ली/वारंगल। तेलंगाना के वारंगल जिले में काकतीय काल के एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़े जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब 800 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर पर बुलडोजर चलने से लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। मामला सामने आते ही केंद्र सरकार का संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग सक्रिय हो गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है।

स्कूल निर्माण के लिए हटाया गया मंदिर, सामने आया चौंकाने वाला दावा

जानकारी के मुताबिक वारंगल के खानपुर मंडल स्थित अशोक नगर इलाके में मौजूद यह प्राचीन शिव मंदिर सरकारी इंटीग्रेटेड स्कूल परियोजना के लिए जमीन खाली कराने के दौरान ध्वस्त किया गया। स्थानीय लोगों और विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि यह मंदिर काकतीय शासक गणपतिदेव के शासनकाल का था।

सबसे अहम बात यह बताई जा रही है कि मंदिर परिसर में 1231 ईस्वी का सात पंक्तियों वाला दुर्लभ तेलुगु शिलालेख भी मौजूद था, जिसे ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

1965 के दस्तावेजों में भी दर्ज था मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का उल्लेख वर्ष 1965 में विरासत विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी किया गया था। यह स्थल ऐतिहासिक ‘कोटा कट्टा’ क्षेत्र में स्थित था, जो प्राचीन किलेबंदी और काकतीय स्थापत्य के लिए जाना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहता तो मंदिर को संरक्षित किया जा सकता था या फिर सुरक्षित तरीके से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता था। लेकिन बिना पर्याप्त संरक्षण प्रक्रिया अपनाए ढांचे को गिरा दिया गया।

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण तक पहुंचा मामला

मामले ने तूल तब पकड़ा जब अधिकार कार्यकर्ता और वकील रामा राव इमानेनी ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग ने केस दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारियों ने पुरातत्व विभाग और बंदोबस्ती विभाग से जरूरी अनुमति लिए बिना कार्रवाई की। इसे विरासत संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया जा रहा है।

अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग तेज

तेलंगाना विरासत अधिनियम की धारा 30 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है। साथ ही राज्य सरकार पर यह आरोप भी लगाया गया है कि अब तक विरासत संरक्षण समिति का गठन नहीं किया गया, जिसकी वजह से ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

प्रशासन ने दी सफाई, पुनर्निर्माण का आश्वासन

विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने अपनी सफाई पेश की है। प्रशासन का कहना है कि मौके पर केवल जर्जर अवशेष मौजूद थे और उस संरचना को आधिकारिक रूप से संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त नहीं था।

हालांकि बढ़ते विरोध और जनदबाव के बीच वारंगल कलेक्टर और स्थानीय विधायक ने स्थल का दौरा किया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों की सलाह लेकर मंदिर का दोबारा निर्माण कराया जाएगा।

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