दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा वार कमर्शियल वाहनों पर बढ़ा ECC चार्ज, हर साल बढ़ोतरी का भी नियम लागू

admin  - News & Entertainment
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दिल्ली। राजधानी में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों, खासकर डीजल ट्रकों, को अधिक पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क यानी एनवायरमेंटल कंपनसेशन चार्ज देना होगा। इस फैसले का सीधा उद्देश्य शहर की हवा को साफ करना और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाना है।

डीजल ट्रकों पर सबसे ज्यादा असर पुराने और भारी वाहन होंगे महंगे

सरकार के नए नियमों के अनुसार ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अब बढ़ा हुआ ECC लागू किया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर डीजल ट्रकों और पुराने कमर्शियल वाहनों पर पड़ेगा।

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ऐसे वाहनों का शहर में प्रवेश कम होगा और लोग स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ेंगे।

हर साल बढ़ेगा ECC चार्ज प्रदूषण पर लगातार नियंत्रण की रणनीति

इस नए फैसले में सिर्फ शुल्क बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि एक स्थायी व्यवस्था भी जोड़ी गई है। अब हर साल अप्रैल में ECC में 5 प्रतिशत की अनिवार्य बढ़ोतरी की जाएगी।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समय के साथ इस शुल्क का असर कम न हो और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास लगातार मजबूत बने रहें।

नए ECC रेट कितने बढ़े किस श्रेणी पर कितना असर

नई अधिसूचना के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों पर शुल्क में बढ़ोतरी की गई है।

  • कैटेगरी 2 हल्के कमर्शियल वाहन और कैटेगरी 3 टू एक्सल ट्रक
    पुराना शुल्क 1400 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये
  • कैटेगरी 4 तीन एक्सल ट्रक और कैटेगरी 5 भारी ट्रक
    पुराना शुल्क 2600 रुपये से बढ़कर 4000 रुपये

इस बदलाव से हल्के कमर्शियल वाहनों पर लगभग 600 रुपये और भारी वाहनों पर 1400 रुपये तक का अतिरिक्त भार बढ़ गया है।

सरकार का तर्क प्रदूषण फैलाने वालों को अब चुकानी होगी ज्यादा कीमत

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह कदम राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब राजधानी प्रदूषण का अतिरिक्त बोझ नहीं उठा सकती।

सरकार का संदेश साफ है जो अधिक प्रदूषण करेगा उसे अधिक कीमत चुकानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी नियमों को मिला कानूनी समर्थन

इस नए ECC ढांचे को 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिल चुकी है। कोर्ट ने इसे संतुलित और न्यायसंगत बताया है और हर साल 5 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रावधान को भी सही ठहराया है।

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को छोड़कर अन्य भारी वाहन शहर में प्रवेश करने के बजाय बाहरी एक्सप्रेसवे का उपयोग करें ताकि ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम किए जा सकें।

पुराने सिस्टम की जगह नई सख्ती 2015 के नियम अब हुए अप्रभावी

सरकार का कहना है कि वर्ष 2015 में लागू किया गया ECC अब अपनी प्रभावशीलता खो चुका था। बढ़ती महंगाई और बदलती परिस्थितियों के कारण इसका असर कम हो गया था, इसलिए दरों में संशोधन जरूरी हो गया।

निष्कर्ष राजधानी की हवा सुधारने की बड़ी कोशिश

दिल्ली सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। नए नियमों से जहां कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर पड़ेगा, वहीं राजधानी की हवा को साफ करने की दिशा में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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