अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को लेकर पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में हुई अहम कूटनीतिक वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। करीब 15 घंटे तक चली लंबी बातचीत के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान, समझौता न होने पर जताई चिंता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ शब्दों में कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बावजूद कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि अब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट रहा है।
वेंस ने यह भी संकेत दिया कि इस असफलता का असर ईरान पर ज्यादा पड़ सकता है।
ईरान की कड़ी शर्तें बनीं बाधा
वार्ता के दौरान ईरान ने कई अहम मांगें सामने रखीं, जिन पर सहमति बनना मुश्किल साबित हुआ। इनमें प्रमुख रूप से
- सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की मांग
- हिजबुल्लाह, इराक और यमन में सैन्य गतिविधियों पर रोक
- अमेरिका में जमी ईरानी संपत्तियों को तुरंत जारी करना
- Strait of Hormuz पर नियंत्रण और ट्रांजिट शुल्क का अधिकार
- शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति
इन शर्तों ने बातचीत को जटिल बना दिया।
इजरायल का दावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियान से ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचा है।
उनके अनुसार अब ईरान के पास सक्रिय संवर्धन सुविधाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के संकेत
वार्ता के विफल रहने के बाद मध्य-पूर्व में हालात और तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है। कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है, जिससे आने वाले समय में स्थिति और जटिल हो सकती है।
