रायपुर और राजनांदगांव में सहकारिता विभाग से जुड़ा बड़ा मामला सामने आते ही प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गया। कथित अवैध नियुक्तियों का खुलासा होते ही कुछ ही घंटों के भीतर दोनों विवादित आदेशों को रद्द कर दिया गया, जिससे विभाग में हलचल तेज हो गई।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद त्वरित फैसला
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले में केदार कश्यप ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला सहकारिता कार्यालय, राजनांदगांव ने संशोधित आदेश जारी कर दोनों नियुक्तियों को निरस्त कर दिया।
शुभम कांडे की नियुक्ति और पदोन्नति रद्द
1 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत शुभम कांडे को सेवा सहकारी समिति झिथराटोला से नवगठित घुपसाल समिति का प्रभारी प्रबंधक बनाया गया था।
अब इस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। साथ ही 27 जनवरी 2026 से जुड़ी उनकी पदोन्नति प्रक्रिया भी समाप्त कर दी गई है।
उन्हें पूर्व पद पर ही कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
सौम्य कांडे का समायोजन भी निरस्त
इसी तरह सौम्य कांडे को लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर समायोजित करने से संबंधित आदेश को भी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
नियमों की अनदेखी के आरोप
सूत्रों का दावा है कि इन नियुक्तियों में नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया था। आरोप यह भी है कि प्रक्रिया में प्रभाव और रिश्तेदारी का उपयोग किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे।
के.एन. कांडे का नाम चर्चा में
पूरे मामले में के.एन. कांडे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन पर पद और प्रभाव के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं।
आगे की कार्रवाई पर नजर
इस घटनाक्रम के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या विभाग केवल आदेश रद्द करने तक सीमित रहेगा या पूरे मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
